Sunday, January 27, 2008

Second Edition of the Biography of Mohammad Rafi "Meri Awaz Suno" has been published.

Second Edition of the Biography of Mohammad Rafi "Meri Awaz Suno" has been published.
After getting overwhelming response and appreciation, the first biography of great music legend Mohammad Rafi “Meri Awaz Suno” has come out with new look and more attractive features. The new edition of the book has more information, more pages and more photographs of Rafi Saheb.
As it was told in an earlier post in www।mohdrafi.com that the responses of the Rafi fans on the first edition of the book was unbelievable that has encouraged me to bring out the second edition of the book with additions. Being a writer and a diehard Rafi fan, I know that the appreciation which I got for the book is not due to my writing and my work, but because of the magic of the person who left us more than 27 years ago but his songs are still enthralling and delighting us. All I can only say that Mohd. Rafi is matchless and there would not be second Rafi in this universe. For Rafi fans like us, whose number may be millions, Mohammad Rafi is the one and only, source of inspiration and his songs are like Oxygen, in absence of which survival is impossible. We all Rafi fans not only want to listen his melodious voice but also want to know about each and every aspects of his life.
The first edition of the book was released in the inaugural function of Delhi Chapter of Rafi Foundation by renowned singing actress Padmashree Puspa Hans and well-known classical singer Padambhushan Shanno Kurana। The function was held at Punjabi Bhawan (New Delhi) on the eve of 27th death anniversary in which a number of personalities from the field of Music, Art and Culture and Media Participated. The book was also released by Mohd. Ali Ashraf Fatmi, Minister of State in Human Resource Development Minister in an overpacked function (Ek Sham, Rafi Ke Nam) on 31st July, 2007 in Patna - the Capital of Bihar.
This book has been published by Sachi Prakashan. In second edition of the book, which published only some days ago, there are additional chapters, information and photographs. This book is in Hindi, but we are trying hard to publish this book in English, Urdu and other languages so that Rafi fans of different linguistic backgrounds and knowledge can also read the book about Rafi Saheb.The second edition contain 176 pages and more than 20 chapters.The price of the book is Rs। 150/ only (including postal/courier charges). Those who want to get this book can contact me on following address.
VINOD VIPLAVNews Editor in UNIVARTA, Hindi News Service of United News of India (UNI)
Address :21, UNI APARTMENTSSector – 11, VASUNDHARA, GHAZIABADPIN - 201012 (U।P)
TEL - 09868793203/0120-२८८०३२४
Email - rafifoundation@gmail.com, screenindia@gmail.com

Thursday, March 22, 2007

वि\षय
अध्याय-एक : महिला स\शक्तिकरण-स्थितिया¡
महिलाओं की स्वतंत्रता और समानता की पथरीली राहें ,
आ¡कड़ों में महिलाओं की स्थिति, महिला-पुरु\ष असंतुलन, गुम हो चुकी महिलाएं, नारी भू्रण हत्या, संवैधानिक संकल्पों की हकीकत, अंतराZ\ष्ट्रीय वचनबद्धता, प्रति\ष्ठा के साथ जीवन
हिंसा से त्रस्त आधी दुनिया महिला विरोधी हिंसा दे\श हित में नहीं, दहेज हत्या के मामलों में वृfद्ध, बढ़ती घरेलू हिंसा, महानगरों में उत्पीड़़न
स्वस्थ जीवन के अधिकारों से वंचित महिलाएं 22लड़के-लड़कियों के साथ असमान व्यवहार, प्रजनन संबंधी स्वास्थ्य, अधिक प्रजनन के खतरे, असुरक्षित प्रसव, पो\षण सबंधी समस्याएं, f\शक्षा का कुपो\षण से संबंध
औरत के वजूद को खतरे में डालती नारी भू्रण हत्या 27बढ़ती पुत्र लालसा, दहेज प्रथा ने बढ़ायी नारी भू्रण हत्या, चीन से सबक लेने की जरूरत, मेडिकल टर्मिने\शन ऑफ प्रिगनेंसी एक्ट
प्रसव पीड़ा और मौत की त्रासदी झेलती औरतें 32कुपो\षण और कम उम्र में विवाह, एनीमिया का खतरा, चिकित्सा सुविधाओं का महत्व, जागरूकता भी जरूरी
फैसलों में भागीदार क्यों नहीं बनती महिलाएं 37ंभारतीय महिलाएं क्या निजी निर्णय लेती हैं ?, क्या भारतीय महिलाएं व्यक्तिगत पसंद का इजहार करती हैं?, अधिकारों को व्यवहार में कैसे लाया जाए?, निर्णय लेने की क्षमता का विकास
\शो\षण के बगैर कार्य करने की स्वतंत्रता के मार्ग में बाधायें 41कितनी भारतीय महिलाएं श्रमिक हैं? महिलाओं पर कार्य दबाव, श्रम के बोझ तले दबा जीवन, किस तरह के कार्य करती हैं महिलाएं, कितना आय प्राप्त करती हैं महिलाएं, गृह कार्य की कीमत, गृहकार्य का मूल्यांकन
कितना सुरक्षित है कार्यस्थल 47कार्यस्थल का प्रतिकूल वातावरण, रात्रिपाली में काम की मुf\श्कलें
मुद्दों से भटकाती मीडिया 50प्रिंट मीडिया एवं महिला मुद्दे, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एवं महिलाएं, सिनेमा और महिलाएं, सिनेमा, बलात्कार और महिलाएं
अध्याय-दो : महिला स\शक्तिकरण - पहल
महिला आ¡दोलनों ने लायी जागरूकता 58आजादी के बाद महिला आ¡दोलन, आ¡दोलनों से बढ़ती आत्मनिर्भरता एवं सजगता, महिला स\शक्तिकरण की पहल
f\शक्षा की जद्दोजहद 61महिला f\शक्षा- एक सामाजिक जरूरत, भारत में महिला साक्षरता की स्थिति, कितनी लड़किया¡ स्कूल जाती हैं?, अमीरी-गरीबी का भेद, स्कूली वातावरण, घरेलू श्रम के बोझ से दबी लड़किया¡, लड़कियों को घरेलू बाल श्रम से कैसे बचाया जाए? साक्षरता के अंतर को पाटना, महिला साक्षरता के लिए पहल
अध्याय-तीन : महिला स\शक्तिकरण-कानूनी संबल
महिलाओं के खिलाफ अपराध और कानून 69कानूनी प्रक्रियाओं में सुधार जरूरी, अपने ही करते हैं वि\श्वासघात
यौन दुव्र्यवहार और बलात्कार कानून 72यौन दुव्र्यवहार, f\शकायत मिलने पर उचित कदम, विविध व्यवस्था, ए़-के- चौपड़ा का मामला, भारतीय दंड संहिता में प्रावधान, भारत में बलात्कार संबंधित कानून, दाम्पत्य छूट, क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट 1983, बलात्कार का प्रयास, न्याय के मार्ग में रूकावटें, रफीक के मामले में कृ\ष्णा अय्यर के विचार
कार्य स्थल पर यौन उत्पीड़न एवं दुव्र्यवहार 83 यौन उत्पीड़न क्या है?, कार्यस्थल क्या है?, यौन उत्पीड़न के कुछ महत्वपूर्ण मामले, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न को नियंत्रित करने के लिए दि\शानिर्दे\श, दि\शा निर्दे\श कैसे आए?, क्या है नियोक्ता की जिम्मेदारी?, क्या कर सकती हैं महिलाएं?तलाक एवं अलगाव संबंधित कानूनी प्रावधान 87भारत में तलाक संबंधित कानून, तलाक के लिए आधार, तलाक का परिणाम, तलाक बनाम अलगाव, अदालती अलगाव को चुनने के लिए तथ्य, अदालती अलगाव के लिए आधार, अलग हुई महिला के अधिकार, अलगाव करारनामा
दहेज के खिलाफ लड़ाई 92सामाजिक हैसियत का आधार बनता दहेज, दहेज हत्यायें, दहेज विरोधी प्रावधान, नियंत्रित होती दहेज प्रथा
बाल विवाह रोकने के कानून 97बाल विवाह के खतरे, भारत में बाल विवाह नियमों का उल्लंघन
अध्याय-चार : महिला स\शक्तिकरण-कामयाबी
आर्थिक मोचोZं पर महिलाओं की भागीदारी 102प्रबंधन संभालती महिलाएं, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, आर्थिक मोर्चे पर महिला-पुरु\ष अनुपात, कृf\ष क्षेत्र में नारीवाद, आर्थिक मोर्चे पर महिला-पुरु\ष अनुपात
प्रबंधन में महिलाओं की भागीदारी 107नयी रोल मॉडल बनी महिलाएं, अभी भी है लंबा फासला, बदलनी होगी मानसिकता, आत्मवि\श्वास में कमी क्यों?
कार्यपालिका में महिलाएं 111महिला आरक्षण विधेयक के मार्ग में बाधायेंं, महिला आरक्षण से होने वाले बदलाव
राजनीतिक \शक्ति का द्वार : पंचायती राज 114
महिला उत्थान के लिये सरकार के कार्यक्रम 116
बॉक्सप- उ-प्र- में 1000 पुरु\षों पर केवल 860 स्त्रिया¡ 13पारिवारिक पराम\र्श केंद्र 38साक्षरता में फिसड्डी, बच्चे पैदा करने में आगे 62क्या है \शारदा कानून 98कामकाजी महिलाओं की फौज 105

Preface of the book - Abala banam Sabala

सिद्ध नारीवादी जर्मेनी ग्रीर ने एक बार कहा था कि भारत में गायों और महिलाओं के साथ एक सा सलूक किया जाता है। यहा¡ गायों की पूजा होती है। गाय को गौ माता का दजाZ दिया गया है। इसी तरह से स्त्रियों को \शक्ति और दुगाZ के रूप में पूजा जाता है। वेदों में कहा गया है - `यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता।´ अथाZत् जह नारी की पूजा होती है वहा¡ देवता का वास होता है। लेकिन ये ग्रंथों और किताबों की बातें हैं। यथार्थ में हमारे समाज में हमे\शा से ही महिलाओं का दोयम दजाZ रहा है। समाज में महिलाओं की दारूण स्थिति के बारे में रा\ष्ट्र कवि मैथली \शरण गुप्त ने कहा था- `नारी जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी, आ¡चल में है दूध और आ¡खों में पानी।´ हमारा इतिहास महिलाओं पर तरह-तरह के अत्याचारों एवं बंधनों का गवाह रहा है। अतीत में महिलाओं को विधवा, बाल विवाह, दहेज और सती जैसी प्रथाओं के बहाने प्रताडि़त किया जाता रहा है। इतिहास के हर काल में महिलाओं को हर क्षेत्रों में- सार्वजनिक से लेकर निजी जीवन में और राजनीति से लेकर सामाजिक जीवन में सतत् रूप से दबाया जाता रहा है।
लेकिन आज महिला आ¡दोलनों के कारण महिलाओं में नयी चेतना पैदा हुयी है और वे अपने अधिकारों के प्रति सजग हुयी हैं। इसके अलावा महिला f\शक्षा और आर्थिक विकास के कारण भी महिलाओं की स्थिति में सुधार हुआ है और महिलाएं बड़ी संख्या में घर की दहलीज को ला¡घ कर विभिन्न आर्थिक गतिविधियों में अपना योगदान देने लगीं हैंं। महिला कल्याण के लिए सरकार की ओर से चलाये गए विभिन्न कार्यक्रमों के कारण महिलाएं काफी संख्या में स्व-रोजगार के क्षेत्र में आगे आई हैंं और वे आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनी हैं। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद संविधान में निहित स्वतंत्रता और समानता के सिद्धा¡तों से प्रभावित होकर महिलाओं में आत्मनिर्भरता के लिये पैदा हुई नई सोच एवं चेतना के परिणामस्वरूप दे\श में कामकाजी महिलाओं की एक नई फौज तैयार हुई। न केवल बड़े \शहरों में, बल्कि छोटे \शहरों और कस्बों में भी महिलाएं नौकरी-रोजगार करने लगी हैं। इसी का परिणाम है कि आज अन्य दे\शों की तुलना में भारत में पे\शेगत तौर पर सकु\शल एवं प्रf\शक्षित महिलाओं की संख्या सबसे अधिक है।
आर्थिक क्षेत्रों में आई महिलाओं की इन कामयाबियों के कारण समाज में महिलाओं की स्थिति में सुधार अव\श्य हुआ है लेकिन साथ ही साथ नयी समस्याएं एवं प्रवृतिया¡ भी पैदा हुई हैं। दे\श में आज चिकित्सा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हुई प्रगति का दुरुपयोग महिलाओं के खिलाफ हो रहा है। अब भी महिलाएं दहेज के लिये जलायी जा रही हैं अथवा अपने ऊपर होने वाले अत्याचारों से तंग आकर आत्महत्या करने के लिये मजबूर हो रही हैं। महिलाओं के खिलाफ बलात्कार और यौन हिंसा की घटनाएं बदस्तूर जारी है। ऊ¡ची जातियों द्वारा निम्न जाति की महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार अथवा उन्हें नंगा करके घुमाये जाने की घटनाएं अक्सर प्रका\श में आती रहती हैं। दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं। इस तरह की समस्याओं से निबटने के लिए न केवल कड़े कानून बनाकर उन्हें कड़ाई से लागू किये जाने की जरूरत है, बल्कि महिलाओं के साथ-साथ पूरे समाज को सचेत एवं जागरूक बनाने की जरूरत है। वैसे महिलाओं की स्थितियों में सुधार लाने और उनके स\शक्तिकरण के लिये आज भी सरकारी और गैर सरकारी पहल लगातार जारी है। इस क्रम में एक महत्वपूर्ण पहल 1988 में संसद में महिला आरक्षण विधेयक का पे\श किया जाना है। महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए रा\ष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तथा महिलाओं के लिये नीतिया¡ सुझाने के लिए रा\ष्ट्रीय महिला परि\षद कार्यरत है। सरकार की ओर से इस तरह के और भी कई कदम उठाये जा रहे हैं। साथ ही दे\श में सक्रिय अनेक महिला संगठन महिलाओं को उनके हक दिलाने के लिये संघ\र्षरत हैं।
मौजूदा समय में महिलाओं की समस्याओं और उनसे निबटने के लिये महिलाओं के संघ\र्ष की एक झलक पे\श करने के उद्दे\श्य से लिखी गई इस पुस्तक में दे\श में महिलाओं की कामयाबियों एवं उनकी कठिनाइयों के अलग-अलग आयामों का खाका पे\श करने के अलावा उन सवालों एवं चुनौतियों को रेखा¡कित किया गया है जिनको लेकर अभी भी बहुत कुछ किये जाने की जरूरत है। इसके अलावा महिला f\शक्षा तथा महिलाओं की आत्मनिर्भरता के कारण महिलाओं और समाज में विकसित हो रही नयी प्रवृतियों एवं सोच को समझने की भी कोf\श\श की गई है। दे\श की बहुसंख्यक आबादी की भा\षा हिन्दी में इस तरह की पुस्तकों के अभाव को ध्यान मे रखते हुए लिखी गई यह पुस्तक रोजमरZे की चुनौतियों एवं मुf\श्कलों को झेल रही महिलाओं के अलावा आम महिलाओं के लिए तो उपयोगी साबित होगी ही, साथ ही साथ यह पुस्तक महिलाओं को बराबरी के हक दिलाने के लिए सरकार, महिला संगठनों और राजनीतिक दलों के प्रयासों में भी किसी न किसी रूप में मददगार बनेगी।

Saturday, March 3, 2007

Book on women empowerment


Book on women empowerment

Abala banam sabala

Published with the financial support from Hindi Academy, Delhi Govt.
Price-Rs. 200.00

Writer - Sushila Kumari
winer of Bhartendu Harishchandra Award for the year of 2003
Published by Sachi Prakashan
New Delhi - Mumbai
To know more about the book please contact on 09868793203 (Mobile)